दो दशक की यादों के बाद CID का सफर क्यों रुका? Dayanand Shetty ने बताई शो के बंद होने की असली वजह

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टेलीविजन की दुनिया में कुछ धारावाहिक ऐसे होते हैं जो सिर्फ एक शो नहीं रहते, बल्कि दर्शकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। CID भी ऐसा ही एक लोकप्रिय शो रहा है। ACP प्रद्युमन, दया और अभिजीत जैसे किरदारों ने लंबे समय तक घर-घर में अपनी पहचान बनाई। खासतौर पर Dayanand Shetty का दया वाला किरदार दर्शकों के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी उनके नाम के साथ लोग उसी भूमिका को जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि CID से जुड़ी कोई भी खबर सामने आती है तो पुराने दर्शकों की दिलचस्पी तुरंत बढ़ जाती है।

करीब दो दशक तक दर्शकों का मनोरंजन करने वाले इस शो को लेकर अब एक बार फिर चर्चा तेज है। सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक सफल रहने के बावजूद आखिर मेकर्स को इसे बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? Dayanand Shetty ने शो के सफर और इसके बंद होने की वजह को लेकर अपनी बात रखी है, जिसने पुराने फैंस का ध्यान खींचा है।

CID की शुरुआत से बनी खास पहचान

CID की शुरुआत 1998 में हुई थी और धीरे-धीरे यह भारतीय टेलीविजन के सबसे पहचान वाले क्राइम शो में शामिल हो गया। उस समय टीवी पर क्राइम और इन्वेस्टिगेशन को इस अंदाज में पेश करने वाले बहुत कम शो थे। CID ने अपनी कहानी, जांच के तरीके और यादगार किरदारों के जरिए अलग जगह बनाई।

ACP प्रद्युमन की सख्त शैली, अभिजीत की समझदारी और दया की ताकत दर्शकों को काफी पसंद आई। कई डायलॉग और सीन समय के साथ पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए।

दया के किरदार ने बनाई अलग पहचान

Dayanand Shetty के लिए दया का किरदार उनके करियर का सबसे यादगार हिस्सा बन गया। उनके किरदार की ताकत और अपराधियों से पूछताछ करने का अलग अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया।

दया सिर्फ एक पुलिस अधिकारी का किरदार नहीं था, बल्कि वह शो की पहचान बन गया था। इसी वजह से जब भी CID की बात होती है, दया का नाम अपने आप सामने आ जाता है। Dayanand Shetty ने भी कई मौकों पर बताया है कि इस किरदार ने उन्हें दर्शकों के बेहद करीब पहुंचाया।

लंबे समय तक चलना बना चुनौती

किसी भी टीवी शो को कई सालों तक लगातार चलाना आसान काम नहीं होता। समय के साथ दर्शकों की पसंद बदलती है, टीवी देखने का तरीका बदलता है और नए तरह के कंटेंट की मांग बढ़ती है। CID जैसे लंबे समय तक चलने वाले शो के सामने भी यही चुनौती रही।

एक ही तरह के फॉर्मेट को लगातार नए अंदाज में पेश करना जरूरी होता है। अगर कहानी और प्रस्तुति में बदलाव न हो तो दर्शकों की दिलचस्पी कम होने का खतरा रहता है। ऐसे में मेकर्स के सामने शो को जारी रखने और उसकी पुरानी लोकप्रियता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है।

किरदारों से जुड़ी भावनाएं

CID के कलाकारों और दर्शकों के बीच एक खास रिश्ता बन चुका था। कई दर्शकों ने इस शो को अपने बचपन और परिवार के साथ जुड़े समय का हिस्सा माना। इसलिए शो के बंद होने की खबर सिर्फ एक टीवी प्रोग्राम के खत्म होने जैसी नहीं लगी।

Dayanand Shetty जैसे कलाकारों के लिए भी यह सफर बेहद खास रहा होगा। उन्होंने वर्षों तक एक ही किरदार को निभाते हुए दर्शकों का प्यार हासिल किया। इतने लंबे समय तक किसी किरदार से जुड़े रहना अभिनेता के करियर में बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

आज भी नहीं भूले दर्शक

CID का दौर भले बदल गया हो, लेकिन शो की लोकप्रियता पूरी तरह खत्म नहीं हुई। पुराने एपिसोड आज भी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं। दया और अभिजीत की जोड़ी, ACP प्रद्युमन के डायलॉग और टीम की जांच करने की शैली आज भी मीम्स और वीडियो के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचती है।

यही वजह है कि जब भी शो की वापसी या पुराने कलाकारों से जुड़ी कोई खबर आती है, फैंस तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं।

CID की विरासत रहेगी कायम

टेलीविजन पर किसी शो का इतने लंबे समय तक टिके रहना अपने आप में बड़ी बात है। CID ने न सिर्फ क्राइम-इन्वेस्टिगेशन जॉनर को लोकप्रिय बनाया, बल्कि अपने किरदारों को दर्शकों के बीच ऐसी पहचान दिलाई जो शो खत्म होने के बाद भी बनी रही।

Dayanand Shetty का दया किरदार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज भी कई लोग उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा दया के नाम से पहचानते हैं। शो का सफर भले किसी पड़ाव पर रुका हो, लेकिन दर्शकों की यादों में CID और उसके किरदार लंबे समय तक बने रहेंगे।

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