भारतीय फैंस और इंडियन सिनेमा में बैन पर आतिफ असलम ने तोड़ी चुप्पी, कहा- संगीत सीमाओं से बड़ा होता है
पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम ने लंबे समय बाद भारतीय प्रशंसकों और इंडियन सिनेमा में काम पर लगे प्रतिबंध को लेकर खुलकर बात की है। एक हालिया बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग उनके गाने सुनते हैं और कई प्रशंसक अलग-अलग डिजिटल तरीकों से उनका संगीत खोजकर सुनते हैं। उनका कहना था कि कलाकार और श्रोता के बीच का रिश्ता सीमाओं से कहीं बड़ा होता है।
आतिफ असलम ने बातचीत में भारतीय दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत से लगातार प्यार और समर्थन मिलता रहा है। उनके अनुसार संगीत ऐसी भाषा है जिसे समझने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब लोग किसी गीत से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो राजनीतिक सीमाएं पीछे छूट जाती हैं।
गायक ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने करियर में भारतीय संगीत प्रेमियों से बहुत स्नेह पाया है। उनके कई लोकप्रिय गीत भारत में बेहद पसंद किए गए और आज भी लोग उन्हें सुनते हैं। उन्होंने कहा कि यह कलाकार के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है कि उसका काम वर्षों बाद भी लोगों के दिलों में बना रहे।
भारतीय फिल्मों में पाकिस्तानी कलाकारों की भागीदारी का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से संवेदनशील बना हुआ है। कई घटनाओं के बाद दोनों देशों के कलाकारों के बीच पेशेवर सहयोग पर असर पड़ा। इसी संदर्भ में आतिफ असलम से पूछा गया कि वे इस स्थिति को कैसे देखते हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति पर टिप्पणी करने के बजाय संगीत और कला की शक्ति में विश्वास रखते हैं।

आतिफ ने कहा कि कलाकार का काम लोगों तक भावनाएं पहुंचाना होता है। उनके अनुसार संगीत दुख, खुशी, प्यार और उम्मीद जैसी भावनाओं को जोड़ता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी तरह की कटुता के बजाय सकारात्मकता में विश्वास करते हैं।
सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई भारतीय प्रशंसकों ने लिखा कि वे आज भी आतिफ असलम के पुराने गाने नियमित रूप से सुनते हैं और उनकी आवाज को यादगार मानते हैं। वहीं कुछ लोगों ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर अलग-अलग राय भी व्यक्त की।
मनोरंजन विशेषज्ञों का कहना है कि आतिफ असलम की लोकप्रियता भारतीय उपमहाद्वीप में लंबे समय से बनी हुई है। ‘तुझे कितना चाहने लगे’, ‘पहली नजर में’, ‘तेरा होने लगा हूं’ और कई अन्य गीतों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई थी। उनकी आवाज रोमांटिक गीतों के साथ खास तौर पर जुड़ी हुई मानी जाती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने संगीत की पहुंच को वैश्विक बना दिया है। आज श्रोता दुनिया के किसी भी हिस्से का संगीत आसानी से सुन सकते हैं। ऐसे में सांस्कृतिक सीमाएं पहले की तुलना में कम कठोर दिखाई देती हैं और कलाकारों का प्रभाव कई देशों तक फैल जाता है।
आतिफ असलम ने बातचीत में भविष्य को लेकर आशावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे अच्छा संगीत बनाते रहना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि लोग उसे प्यार देते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों के बीच सम्मान और संवाद बना रहना चाहिए क्योंकि कला का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है।
फिलहाल उनका यह बयान सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय प्रशंसकों के प्रति जताया गया उनका आभार और संगीत को सीमाओं से ऊपर रखने की बात लोगों के बीच व्यापक रूप से साझा की जा रही है। इससे एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि कला और संगीत किस हद तक राजनीतिक सीमाओं से स्वतंत्र हो सकते हैं। लेकिन आतिफ असलम का संदेश साफ था—संगीत दिलों को जोड़ने का माध्यम है और यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है।
