ज़ोई सलदाना बोलीं- हॉलीवुड में समावेशिता पर सवाल मुझसे नहीं, फैसले लेने वालों से पूछिए
हॉलीवुड अभिनेत्री ज़ोई सलदाना ने हाल ही में फिल्म उद्योग में समावेशिता (Inclusivity) को लेकर होने वाली चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनसे बार-बार यह पूछे जाने पर उन्हें थकान महसूस होती है कि हॉलीवुड कितना समावेशी है। अभिनेत्री का कहना है कि इस सवाल का जवाब कलाकारों से ज्यादा उन लोगों से मांगा जाना चाहिए जो उद्योग में फैसले लेते हैं।
एक बातचीत के दौरान ज़ोई ने कहा कि मीडिया अक्सर अभिनेताओं से प्रतिनिधित्व, विविधता और अवसरों पर राय मांगता है, जबकि वास्तविक शक्ति स्टूडियो प्रमुखों, निर्माताओं, नेटवर्क अधिकारियों और कास्टिंग निर्णय लेने वाले लोगों के पास होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इन सवालों को गेटकीपर्स से पूछिए”, क्योंकि वही तय करते हैं कि किसे अवसर मिलेगा और किसे नहीं।
ज़ोई सलदाना लंबे समय से हॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं। उन्होंने Avatar, Guardians of the Galaxy और Star Trek जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया है। उनकी सफलता के बावजूद वे मानती हैं कि उद्योग में प्रतिनिधित्व को लेकर बातचीत अभी समाप्त नहीं हुई है।
अभिनेत्री ने कहा कि कलाकार अक्सर कैमरे के सामने दिखाई देते हैं, इसलिए लोग मान लेते हैं कि उनके पास पूरी व्यवस्था बदलने की शक्ति है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई महत्वपूर्ण फैसले बंद कमरों में लिए जाते हैं। उनके अनुसार यदि उद्योग में वास्तविक बदलाव चाहिए तो नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि विविधता पर चर्चा केवल पुरस्कार समारोहों या प्रचार अभियानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अवसरों का समान वितरण लेखन, निर्देशन, निर्माण, तकनीकी विभागों और प्रबंधन स्तर तक पहुंचना चाहिए। तभी समावेशिता का प्रभाव स्थायी होगा।
ज़ोई ने बातचीत में यह भी संकेत दिया कि वे सामाजिक मुद्दों पर बात करने से पीछे नहीं हटतीं, लेकिन हर बार उन्हीं कलाकारों से एक जैसे सवाल पूछना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और दर्शकों को यह भी देखना चाहिए कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विविधता कितनी है।
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि ज़ोई ने उद्योग की वास्तविक संरचना की ओर ध्यान दिलाया है। समर्थकों का मानना है कि प्रतिनिधित्व की बहस में सत्ता संरचना पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि प्रभावशाली कलाकारों की आवाज भी बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिल्म विश्लेषकों का कहना है कि हॉलीवुड में पिछले कुछ वर्षों में विविधता को लेकर कई पहल हुई हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व में समान प्रतिनिधित्व अभी भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ज़ोई का बयान उस बहस को फिर से केंद्र में ले आता है कि परिवर्तन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि वे चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी के कलाकारों को अपनी पहचान साबित करने के लिए अतिरिक्त संघर्ष न करना पड़े। उनके अनुसार प्रतिभा को अवसर मिलने चाहिए, चाहे कलाकार की पृष्ठभूमि, भाषा, रंग या सांस्कृतिक पहचान कुछ भी हो।
मानव संसाधन और मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी उद्योग में समावेशिता केवल सार्वजनिक बयान से नहीं आती। भर्ती, पदोन्नति, निवेश और नेतृत्व चयन जैसी प्रक्रियाओं में बदलाव आवश्यक होता है। ज़ोई का “गेटकीपर्स” वाला बयान इसी व्यापक संस्थागत बदलाव की ओर संकेत करता है।
ज़ोई सलदाना ने अंत में कहा कि वे अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं और उम्मीद करती हैं कि उद्योग में निर्णय लेने वाले लोग भी प्रतिनिधित्व के सवाल को गंभीरता से लेंगे। उनके अनुसार बदलाव तभी वास्तविक माना जाएगा जब वह स्क्रीन पर दिखाई देने के साथ-साथ उद्योग की संरचना में भी नजर आए।
फिलहाल उनका यह बयान हॉलीवुड में समावेशिता की बहस को नया आयाम दे रहा है। ज़ोई सलदाना ने स्पष्ट कर दिया है कि कलाकारों से आगे बढ़कर अब उन लोगों से जवाब मांगा जाना चाहिए जो अवसरों के दरवाजे खोलते या बंद करते हैं। यही उनके संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
