रेखा के साथ ‘उत्सव’ की शूटिंग को याद कर भावुक हुए शेखर सुमन, प्रोफेशनलिज्म की दिल खोलकर की तारीफ
अभिनेता और टीवी प्रस्तोता शेखर सुमन ने हाल ही में फिल्म ‘उत्सव’ की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री रेखा के साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उस दौर की शूटिंग उनके करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रही। शेखर ने कहा कि रेखा न सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं, बल्कि अपने काम के प्रति उनका समर्पण, अनुशासन और प्रोफेशनल रवैया आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है।
शेखर सुमन ने बातचीत के दौरान कहा कि जब उन्हें रेखा जैसी स्थापित और अनुभवी कलाकार के साथ काम करने का मौका मिला, तब वह अपने करियर के शुरुआती दौर में थे। स्वाभाविक रूप से उनके मन में थोड़ा संकोच और उत्साह दोनों था। लेकिन रेखा ने अपने सहज व्यवहार और आत्मीयता से पूरा माहौल सहज बना दिया। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह इंडस्ट्री की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में से एक हैं।
उन्होंने बताया कि रेखा हमेशा समय की पाबंद रहती थीं और शूटिंग शुरू होने से पहले पूरी तैयारी के साथ सेट पर पहुंचती थीं। अपने संवादों, भाव-भंगिमाओं और हर दृश्य की बारीकियों पर वह गंभीरता से काम करती थीं। शेखर के अनुसार, रेखा का मानना था कि एक अच्छा कलाकार वही होता है जो हर सीन को पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाए।
शेखर सुमन ने यह भी कहा कि रेखा अपने सह-कलाकारों का पूरा सम्मान करती थीं। वह नए कलाकारों को सहज महसूस कराने की कोशिश करती थीं और जरूरत पड़ने पर सीन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी देती थीं। उनके साथ काम करते हुए कभी प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं बना, बल्कि उन्होंने हमेशा टीमवर्क को प्राथमिकता दी।

उन्होंने फिल्म ‘उत्सव’ के सेट का माहौल याद करते हुए कहा कि वहां काम को लेकर बेहद सकारात्मक वातावरण रहता था। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम तक हर व्यक्ति अपने काम के प्रति समर्पित था और रेखा का प्रोफेशनल रवैया पूरी यूनिट को प्रेरित करता था। यही वजह थी कि फिल्म की शूटिंग के दौरान सभी लोग पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ काम करते थे।
शेखर ने यह भी स्वीकार किया कि रेखा की अभिनय शैली बेहद स्वाभाविक थी। कैमरे के सामने आते ही वह अपने किरदार में पूरी तरह उतर जाती थीं। उनके भाव, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी प्रभावशाली होती थी कि सह-कलाकार भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए प्रेरित हो जाते थे। उन्होंने कहा कि रेखा के साथ काम करना किसी अभिनय कार्यशाला से कम नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक सफलता बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन रेखा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगातार खुद को बेहतर बनाने की सोच के दम पर यह मुकाम हासिल किया। आज भी वह कई कलाकारों के लिए प्रेरणा हैं और उनकी कार्यशैली से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
फिल्म जगत के जानकारों का मानना है कि अनुभवी कलाकारों के ऐसे अनुभव नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। इससे यह समझने का अवसर मिलता है कि अभिनय केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और टीम भावना का भी परिणाम होता है। रेखा का नाम आज भी भारतीय सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय और व्यक्तित्व से अलग पहचान बनाई।
शेखर सुमन ने बातचीत के अंत में कहा कि उन्हें खुशी है कि उन्हें अपने करियर की शुरुआत में रेखा जैसी दिग्गज कलाकार के साथ काम करने का अवसर मिला। उस अनुभव ने उन्हें अभिनय के साथ-साथ प्रोफेशनल व्यवहार और काम के प्रति समर्पण का महत्व भी सिखाया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव जीवनभर याद रहते हैं और कलाकार को लगातार बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं।
कुल मिलाकर, शेखर सुमन द्वारा साझा किया गया यह अनुभव केवल एक पुरानी फिल्म की याद नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस दौर की झलक भी है जब अनुशासन, मेहनत और कला के प्रति सम्मान को सबसे अधिक महत्व दिया जाता था। रेखा के प्रति उनकी प्रशंसा यह दर्शाती है कि एक महान कलाकार की पहचान केवल उसके अभिनय से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, कार्यशैली और पेशेवर दृष्टिकोण से भी होती है।
