कुमार सानू ने म्यूजिक इंडस्ट्री में राजनीति और अश्लील बोलों पर खुलकर रखी बात, बोले- गानों में मर्यादा जरूरी
बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर बात की। अपने लंबे करियर, बदलते संगीत और आज के दौर के गानों पर चर्चा करते हुए उन्होंने खास तौर पर इंडस्ट्री में राजनीति और अश्लील बोलों को लेकर अपनी राय सामने रखी। कुमार सानू का कहना है कि संगीत की दुनिया में प्रतिभा सबसे जरूरी होनी चाहिए और गानों में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कुमार सानू हिंदी सिनेमा के उन गायकों में शामिल हैं जिनकी आवाज ने 1990 के दशक के संगीत को एक अलग पहचान दी। रोमांटिक गानों से लेकर दर्द भरे गीतों तक उन्होंने कई यादगार गाने दिए हैं। यही वजह है कि जब वह आज के संगीत को लेकर कोई राय रखते हैं तो उनके शब्दों को संगीत प्रेमी ध्यान से सुनते हैं।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में राजनीति के सवाल पर भी अपनी बात रखी। उनका मानना है कि किसी भी रचनात्मक क्षेत्र में लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है, लेकिन राजनीति या गुटबाजी के कारण योग्य कलाकारों को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संगीत किसी एक व्यक्ति या समूह की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह कलाकारों की मेहनत और प्रतिभा से आगे बढ़ता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इंडस्ट्री में मौके हासिल करना हमेशा सिर्फ प्रतिभा पर निर्भर नहीं करता। कई बार पहचान, संपर्क और नेटवर्किंग भी भूमिका निभाते हैं। हालांकि उनके मुताबिक लंबे समय तक टिके रहने के लिए कलाकार के पास अपनी अलग पहचान और मेहनत होना जरूरी है।

कुमार सानू ने आज के गानों के बोल को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि मनोरंजन के नाम पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए जो परिवार के साथ बैठकर सुनने में असहज महसूस हों। उनके अनुसार संगीत का उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करने के साथ भावनाओं को व्यक्त करना भी है, इसलिए गीतकारों और संगीतकारों की जिम्मेदारी बनती है कि शब्दों का चुनाव सोच-समझकर किया जाए।
उन्होंने पुराने दौर के गीतों का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी फिल्मों और गानों में रोमांस, मस्ती और आधुनिकता होती थी, लेकिन कई लोकप्रिय गाने बिना भद्दी भाषा के भी लोगों के दिल में जगह बना लेते थे। उनका मानना है कि अच्छी धुन और मजबूत शब्द आज भी किसी गाने को यादगार बना सकते हैं।
सिंगर ने यह भी कहा कि हर नया संगीत खराब नहीं है। आज के दौर में कई युवा कलाकार शानदार काम कर रहे हैं और संगीत की नई शैलियों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नए गायकों और स्वतंत्र संगीतकारों के लिए मौके भी बढ़ाए हैं। अब किसी कलाकार को सिर्फ बड़े फिल्मी बैनर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
कुमार सानू के मुताबिक सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की वजह से संगीत सुनने का तरीका भी बदल गया है। आज कोई गाना रिलीज होते ही कुछ घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। ऐसे माहौल में गाने को वायरल बनाने का दबाव भी बढ़ गया है। इसी वजह से कभी-कभी निर्माता और कलाकार ऐसे कंटेंट का सहारा लेते हैं जो तुरंत चर्चा तो पैदा करता है, लेकिन लंबे समय तक याद नहीं रहता।
उन्होंने युवा गायकों को सलाह दी कि वे सिर्फ ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय अपनी आवाज और शैली पर काम करें। उनका मानना है कि लोकप्रियता रातोंरात मिल सकती है, लेकिन पहचान बनाने में समय लगता है। संगीत में मेहनत, अनुशासन और लगातार सीखने की आदत किसी भी कलाकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
कुमार सानू की बातों में उनके अनुभव की झलक साफ दिखाई देती है। उन्होंने ऐसे समय में करियर बनाया जब संगीत की सफलता काफी हद तक रेडियो, कैसेट और फिल्मों के प्रदर्शन पर निर्भर करती थी। आज स्ट्रीमिंग, रील्स और सोशल मीडिया ने पूरा संगीत बाजार बदल दिया है। इसके बावजूद वह मानते हैं कि अच्छे संगीत की पहचान कभी खत्म नहीं होती।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री में गानों की भाषा और कंटेंट को लेकर बहस अक्सर सामने आती रहती है। कुछ लोग इसे बदलते समय और दर्शकों की पसंद का हिस्सा मानते हैं, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर हर तरह की भाषा को सही नहीं ठहराया जा सकता।
कुल मिलाकर कुमार सानू ने अपने इंटरव्यू के जरिए संगीत की बदलती दुनिया पर एक अनुभवी कलाकार की नजर रखी। उन्होंने राजनीति और गुटबाजी से ऊपर प्रतिभा को महत्व देने, युवा कलाकारों को अवसर देने और गानों में शब्दों की गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनकी बातों ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि तेजी से बदलते म्यूजिक इंडस्ट्री में लोकप्रियता और गुणवत्ता के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए।
