बेनेट यूनिवर्सिटी दीक्षारंभ 2026 में शुभांशु शुक्ला का संदेश, युवाओं से कहा- भारत की अंतरिक्ष यात्रा में अपनी भूमिका निभाइए
बेनेट यूनिवर्सिटी के दीक्षारंभ 2026 कार्यक्रम में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने छात्रों और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा केवल वैज्ञानिकों की नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक यात्रा है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे विज्ञान, तकनीक, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देकर भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नए छात्र, अभिभावक, शिक्षक और शिक्षाविद उपस्थित थे। शुभांशु शुक्ला ने अपने संबोधन की शुरुआत युवाओं को नई शैक्षणिक यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन केवल डिग्री प्राप्त करने का समय नहीं होता, बल्कि यह सपने देखने, सवाल पूछने और नए विचारों को आकार देने का अवसर होता है।

उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से बदलते परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत विश्व की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल हो रहा है। चंद्रयान, आदित्य और गगनयान जैसी परियोजनाओं ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमता दिखाई है। उनके अनुसार आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह तकनीक, अंतरिक्ष संचार, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में युवाओं के लिए विशाल अवसर उपलब्ध होंगे।
शुभांशु शुक्ला ने छात्रों से कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल रॉकेट बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सामग्री विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और डिजाइन जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पृष्ठभूमि का छात्र इस यात्रा का हिस्सा बन सकता है, यदि उसमें सीखने की जिज्ञासा और मेहनत करने का संकल्प हो।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अनुशासन, धैर्य और निरंतर प्रयास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता से डरने के बजाय उससे सीखना चाहिए। उनके अनुसार अंतरिक्ष कार्यक्रमों में हर छोटी सफलता के पीछे हजारों घंटों की तैयारी और टीमवर्क होता है।
उन्होंने छात्रों को भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों से प्रेरणा लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में भी भारत ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिनकी दुनिया सराहना करती है। यही आत्मविश्वास युवाओं को आगे बढ़ने की ताकत देता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष करियर, अनुसंधान अवसरों और भविष्य की भारतीय अंतरिक्ष योजनाओं से जुड़े सवाल भी पूछे। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत को आने वाले समय में केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक का निर्माता और वैश्विक भागीदार बनना है। इसके लिए विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने युवाओं से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की भी अपील की। उनके अनुसार विज्ञान का अंतिम उद्देश्य समाज को बेहतर बनाना है। अंतरिक्ष तकनीक मौसम पूर्वानुमान, कृषि, आपदा प्रबंधन, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए विज्ञान और तकनीक को लोगों के जीवन से जोड़ना आवश्यक है।
बेनेट यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी इस अवसर को छात्रों के लिए प्रेरणादायक बताया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे संवाद युवाओं को बड़े सपने देखने और वैश्विक स्तर पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
सोशल मीडिया पर भी शुभांशु शुक्ला के संबोधन की चर्चा रही। छात्रों ने उनके संदेश को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई ऊर्जा मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं अब तेजी से विस्तार कर रही हैं। निजी अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती भागीदारी, उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाएं और अंतरिक्ष आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। ऐसे समय में छात्रों को प्रेरित करना भविष्य की वैज्ञानिक क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने संबोधन के अंत में शुभांशु शुक्ला ने कहा कि “हर युवा अपने भीतर एक संभावना लेकर आता है। यदि वह जिज्ञासा, मेहनत और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना बनाए रखे, तो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में उसका योगदान निश्चित है।” उनका यह संदेश दीक्षारंभ 2026 में शामिल छात्रों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बन गया।
