‘रामा रामा’ को ऑस्कर तक पहुंचाने का सपना, ऋषभ रिखीराम शर्मा ने साझा किया अपना विजन
प्रसिद्ध सितार वादक और संगीतकार ऋषभ रिखीराम शर्मा इन दिनों फिल्म ‘रामायण’ के गीत ‘रामा रामा’ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य इस गीत को केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच तक पहुंचाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि गीत को दुनिया भर के दर्शकों का प्यार मिलता है, तो भविष्य में यह प्रतिष्ठित ऑस्कर अवॉर्ड्स तक भी अपनी पहचान बना सकता है। उनके इस बयान के बाद संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में इस गीत को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
ऋषभ रिखीराम शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आधुनिक अंदाज में दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का लगातार प्रयास किया है। उनका मानना है कि भारतीय संगीत में ऐसी शक्ति है जो भाषा और सीमाओं से परे जाकर हर वर्ग के लोगों को जोड़ सकती है।
‘रामायण’ जैसे पौराणिक विषय पर आधारित फिल्म का संगीत भी दर्शकों के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में ‘रामा रामा’ गीत को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऋषभ का कहना है कि इस गीत को तैयार करते समय भारतीय परंपरा, भावनाओं और आधुनिक संगीत प्रस्तुति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, ताकि यह देश के साथ-साथ विदेशों में भी लोगों को पसंद आए।
उन्होंने यह भी कहा कि आज भारतीय फिल्मों और संगीत को दुनिया भर में पहले की तुलना में कहीं अधिक पहचान मिल रही है। कई भारतीय कलाकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और भारतीय कहानियां भी वैश्विक दर्शकों तक पहुंच रही हैं। ऐसे माहौल में यदि किसी भारतीय गीत को ऑस्कर जैसे बड़े मंच पर पहचान मिलती है, तो यह पूरे भारतीय संगीत उद्योग के लिए गर्व की बात होगी।
हाल के वर्षों में भारतीय संगीत और फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वैश्विक दर्शकों के बीच भारतीय कंटेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है कि उनकी रचनाएं दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर सराही जा सकती हैं।
ऋषभ रिखीराम शर्मा का मानना है कि किसी भी गीत की सफलता केवल पुरस्कारों से नहीं मापी जानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह लोगों के दिलों तक पहुंचे और लंबे समय तक याद रखा जाए। यदि कोई रचना भावनात्मक रूप से दर्शकों से जुड़ जाती है, तो वह अपने आप अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने की क्षमता रखती है।

फिल्म उद्योग के जानकारों का भी मानना है कि भारतीय संगीत की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है। तकनीक, प्रस्तुति और वैश्विक सहयोग के कारण भारतीय कलाकारों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में ‘रामा रामा’ जैसे गीत से भी काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
सोशल मीडिया पर भी ऋषभ के इस बयान को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई प्रशंसकों ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संगीत को दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचाने का सपना प्रेरणादायक है। वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद जताई कि यह गीत रिलीज के बाद अपनी धुन, भावनात्मक गहराई और प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहेगा।
फिलहाल ‘रामायण’ और उसके संगीत को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है। यदि ‘रामा रामा’ गीत अपनी उम्मीदों पर खरा उतरता है, तो यह न केवल फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभा सकता है, बल्कि भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
